baroque pop

सुनहरी स्मृतियों का जाल

दीया (Diya)

2 воспр. · 0 в избранном · 4:57

Текст

महल की भीगी दीवारें
पुरानी वो सब पुकारें
खिड़की पे बैठी अकेली
सुलझाती यादों की पहेली
बचपन का वो यार पुराना
जैसे कोई भूला फसाना
संगमरमर पे गिरती बूंदें
तुझको ही हर कोना ढूँढे

हवा में उड़ती पंखुड़ी
सूखी मगर है जुड़ी
ख्वाबों की रेशमी डोरी
कहती है कोई चोरी

सुनहरे जाल में समेटूँ
बीते हर पल को देखूँ
विरह में भी है सुकून
जैसे कोई मीठा जुनून
स्मृति की ये कोमल नरमी
रूह में भरती है गर्मी
सुनहरे जाल में समेटूँ
बीते हर पल को देखूँ

धीमी सी ये थाप
खुद से ही मिलाप
यादों का ये घेरा
बस तेरा और मेरा

हार्पसीकोर्ड की वो खनक
जैसे पायल की झनक
बांसुरी के हल्के स्वर
भीगा हुआ मेरा घर
पंप ऑर्गन की वो गूँज
जैसे कोई मीठी पूँज
सूखे गुलाब की महक
मन में उठी एक चहक

तारों की ये लहर
ठहरा हुआ सा शहर
आँखों में तैरते मंज़र
जैसे कोई गहरा समंदर

सुनहरे जाल में समेटूँ
बीते हर पल को देखूँ
विरह में भी है सुकून
जैसे कोई मीठा जुनून
स्मृति की ये कोमल नरमी
रूह में भरती है गर्मी
सुनहरे जाल में समेटूँ
बीते हर पल को देखूँ

पियानो की कोमल पुकार
स्ट्रिंग्स का बहता सा प्यार
अलंकारों की वो सजावट
बिना किसी भी थकावट
कोई वेदना नहीं यहाँ
बस है मेरा ये जहाँ
मीठी सी एक कसक
चेहरे पे हल्की चमक

सुनहरे जाल में
बीते हर हाल में
यादों के साए
मुझको ये भाए

सुनहरे जाल में समेटूँ
बीते हर पल को देखूँ
विरह में भी है सुकून
जैसे कोई मीठा जुनून
स्मृति की ये कोमल नरमी
रूह में भरती है गर्मी
सुनहरे जाल में समेटूँ
बीते हर पल को देखूँ

धीमी सी ये थाप
खुद से ही मिलाप
यादों का ये घेरा
बस तेरा और मेरा

Комментарии (0)

0/500

Загрузка…

Похожие треки