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दीया (Diya)55 plays
दर्पण के इस महल में धूप की एक लकीर है उड़ते हुए ये नन्हे कण जैसे कोई तस्वीर है सुनहरी सी ये धूल भी यादों की एक ज़ंजीर है हवा में घुली वो महक चंदन और गुलाब की धीमे से कोई पुकारता बातें किसी ख्वाब की दादी की वो सुकुमार यादें रेशम सी ये मीठी यादें विरासत का ये कोमल साज धड़कता है मेरा आज उनका ही तो है अंदाज़ सुकुमार स्नेह का एहसास जैसे वो हों मेरे पास कोने में टूटी एक चूड़ी कांच का एक टुकड़ा हरा पॉटपौर्री की मद्धम खुशबू बचपन जिससे है भरा हर चीज़ में है साया उनका जैसे कोई जादू करा सन्नाटे में गूँजती पायल की वो झंकार है विदाई की इस घड़ी में बस मीठा सा प्यार है दादी की वो सुकुमार यादें रेशम सी ये मीठी यादें विरासत का ये कोमल साज धड़कता है मेरा आज उनका ही तो है अंदाज़ समय की ये महीन बुनावट हर धागा एक कहानी है वो चली गईं पर यहीं कहीं उनकी ही ये निशानी है हवेली की इन दीवारों में बहता हुआ कोई पानी है महीन फिलीग्री सा ये गम आँखें नहीं हैं मेरी नम दादी की वो सुकुमार यादें रेशम सी ये मीठी यादें विरासत का ये कोमल साज धड़कता है मेरा आज उनका ही तो है अंदाज़ सुकुमार स्नेह का एहसास जैसे वो हों मेरे पास
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