baroque pop

रेशमी स्मृतियाँ (Reshmi Smritiyon)

दीया (Diya)

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Lyrics

चाँदनी खिड़की पे ठहरी है
महक चमेली की गहरी है
भीगी पंखुड़ियाँ चुप हैं
बीते लम्हे सब धूप हैं
हवेली की ये तन्हाई
जैसे कोई शहनाई

दादी की वो कहानियाँ
बचपन की सब निशानियाँ
लौट आई हैं आज यहाँ
खोया था मेरा जहाँ

रेशमी यादों का साया
मन ने जिसे है सजाया
ना कोई गिला ना शोर
स्मृतियों की ये डोर
मीठी सी एक टीस है
पुरानी ये कशिश है

(आ... आ... आ...)
(मद्धम सी ये सदा...)

पीतल का वो पानदान
रखा है बनके वरदान
सूखा गुलाब किताब में
डूबा किसी ख्वाब में
धूल की परतों के नीचे
वक़्त हमें पीछे खींचे

हवा में एक सरसराहट
पुरानी उस आहट की
दिल के बंद झरोखों में
एक नई सी सजावट की

रेशमी यादों का साया
मन ने जिसे है सजाया
ना कोई गिला ना शोर
स्मृतियों की ये डोर
मीठी सी एक टीस है
पुरानी ये कशिश है

दीवारों की नक्काशी
जैसे कोई प्यासी
झूमर की मद्धम रोशनी
भूली हुई कोई रागिनी
कांच सी ये ज़िंदगी
स्मृतियों की बंदगी

खामोशी में बातें हैं
ये भीगी सी रातें हैं
शिकवा नहीं ज़माने से
सुकून है याद आने से
खुद से ही मैं कहती हूँ
यादों में ही रहती हूँ

रेशमी यादों का साया
मन ने जिसे है सजाया
ना कोई गिला ना शोर
स्मृतियों की ये डोर
मीठी सी एक टीस है
पुरानी ये कशिश है

(आ... आ... आ...)
(रेशमी सी ये स्मृतियाँ...)

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