baroque pop

कागज़ का लम्हा

दीया (Diya)

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Текст

पुरानी हवेली की दीवार
भीगी हुई है हर राह
कांच पे धूल की चादर
यादों का गहरा सागर
बूंदें जो गिरती हैं नीचे
खिड़की के मद्धम से पीछे
सन्नाटा गाता है लोरी
टूटी है सपनों की डोरी

धीरे से चलती हवा
जैसे कोई पुरानी दुआ
दिल में एक हलचल हुई
रूह मेरी चंचल हुई
सायों का नाच है जारी
लगती है रात ये प्यारी

कागज़ का वो फूल
भूली बिसरी धूल
वक्त वहीं था थमा
मेरा वो पहला समा
ना कोई गम था वहां
बस एक सुनहरा जहां
पनघट की घंटी बजी
रातों में मिश्री घुली

सुनहरा लम्हा
थमा हुआ सपना
कागज़ का फूल
यादों की धूल

अजनबी का वो चेहरा
यादों का रंग है गहरा
बचपन की वो एक शाम
लिख दिया मेरा ही नाम
उसने जो तोहफ़ा दिया
मेरा ही दिल ले लिया
ना कोई बिछड़ने की टीस
ना कोई मिलने की फ़ीस

चांदनी बिखरी है दूर
यादों का छाया सुरूर
रेशमी धागों की लय
खोने का कैसा है भय
सायों का नाच है जारी
लगती है रात ये प्यारी

कागज़ का वो फूल
भूली बिसरी धूल
वक्त वहीं था थमा
मेरा वो पहला समा
ना कोई गम था वहां
बस एक सुनहरा जहां
पनघट की घंटी बजी
रातों में मिश्री घुली

हारप्सिकॉर्ड की तान
संगीत का वरदान
बांसुरी सी वो पुकार
तारों का मीठा सितार
रुका हुआ एक पल
जैसे कोई गंगा जल
पवित्र और पावन सा
सावन की आवन सा

कागज़ का वो फूल
भूली बिसरी धूल
वक्त वहीं था थमा
मेरा वो पहला समा
ना कोई गम था वहां
बस एक सुनहरा जहां
पनघट की घंटी बजी
रातों में मिश्री घुली

सुनहरा लम्हा
थमा हुआ सपना
कागज़ का फूल
यादों की धूल

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