भीगी यादें और चाय
दीया (Diya)93 main
धूल की परतों में छुप गए वो आईने दराजों में सो गए पुराने अफ़साने पीली चिट्ठियों की वो हल्की सरसराहट दे रही है आज फिर दिल पे एक आहट बचपन की गलियों का वो मखमली एहसास जैसे कोई रूह आज भी हो मेरे पास वक्त की स्याही थोड़ी धुंधली सी हुई पर वो खुशबू आज भी अनसुनी नहीं बचपन का वो हसीन सा किनारा तेरी हँसी का वो मीठा सहारा अधूरा वो राग जो हमने गुनगुनाया था हारमोनियम की सुरों में जो सजाया था बरसों बाद भी वो धुन आज ज़िंदा है रूह के किसी कोने में वो शर्मिंदा है टूटे नहीं ये रेशमी धागे कभी साँसों में महकते हैं ये आज भी अधूरा राग पूरा हुआ आज सुरों का साज़ वही पुराना अंदाज़ सफ़ेद चाबियों पे थिरकती थी उँगलियाँ बातों ही बातों में बीतती थीं घड़ियाँ रिकॉर्डर की वो एक मीठी सी पुकार जैसे कोई रूहानी सा वो इकरार धुंधले से शीशे पे तेरा नाम लिखा था वो पल जैसे सदियों से मुकम्मल दिखा था वक्त की स्याही थोड़ी धुंधली सी हुई पर वो खुशबू आज भी अनसुनी नहीं बचपन का वो हसीन सा किनारा तेरी हँसी का वो मीठा सहारा अधूरा वो राग जो हमने गुनगुनाया था हारमोनियम की सुरों में जो सजाया था बरसों बाद भी वो धुन आज ज़िंदा है रूह के किसी कोने में वो शर्मिंदा है टूटे नहीं ये रेशमी धागे कभी साँसों में महकते हैं ये आज भी फासलों ने बस ज़मीन के नक्शे बदले पर हमारे गीत के सुर कभी न फिसले हार्पसीकोर्ड की इस मखमली लहर में तू आज भी शामिल है मेरे हर पहर में ये दूरियाँ तो बस इक पर्दा हैं हम आज भी एक दूजे में ज़िंदा हैं हल्की थाप मीठा विलाप यादों का जाप बिना किसी माप अधूरा वो राग जो हमने गुनगुनाया था हारमोनियम की सुरों में जो सजाया था बरसों बाद भी वो धुन आज ज़िंदा है रूह के किसी कोने में वो शर्मिंदा है टूटे नहीं ये रेशमी धागे कभी साँसों में महकते हैं ये आज भी वही राग, वही सुर, वही बात खामोश होकर भी साथ है ये रात अधूरा राग अब पूरा हो रहा है बीता कल फिर से नया हो रहा है
Memuatkan…