सुनहरी स्मृतियों का जाल
दीया (Diya)2 riproduzioni
पुरानी हवेली की दीवार भीगी हुई है हर राह कांच पे धूल की चादर यादों का गहरा सागर बूंदें जो गिरती हैं नीचे खिड़की के मद्धम से पीछे सन्नाटा गाता है लोरी टूटी है सपनों की डोरी धीरे से चलती हवा जैसे कोई पुरानी दुआ दिल में एक हलचल हुई रूह मेरी चंचल हुई सायों का नाच है जारी लगती है रात ये प्यारी कागज़ का वो फूल भूली बिसरी धूल वक्त वहीं था थमा मेरा वो पहला समा ना कोई गम था वहां बस एक सुनहरा जहां पनघट की घंटी बजी रातों में मिश्री घुली सुनहरा लम्हा थमा हुआ सपना कागज़ का फूल यादों की धूल अजनबी का वो चेहरा यादों का रंग है गहरा बचपन की वो एक शाम लिख दिया मेरा ही नाम उसने जो तोहफ़ा दिया मेरा ही दिल ले लिया ना कोई बिछड़ने की टीस ना कोई मिलने की फ़ीस चांदनी बिखरी है दूर यादों का छाया सुरूर रेशमी धागों की लय खोने का कैसा है भय सायों का नाच है जारी लगती है रात ये प्यारी कागज़ का वो फूल भूली बिसरी धूल वक्त वहीं था थमा मेरा वो पहला समा ना कोई गम था वहां बस एक सुनहरा जहां पनघट की घंटी बजी रातों में मिश्री घुली हारप्सिकॉर्ड की तान संगीत का वरदान बांसुरी सी वो पुकार तारों का मीठा सितार रुका हुआ एक पल जैसे कोई गंगा जल पवित्र और पावन सा सावन की आवन सा कागज़ का वो फूल भूली बिसरी धूल वक्त वहीं था थमा मेरा वो पहला समा ना कोई गम था वहां बस एक सुनहरा जहां पनघट की घंटी बजी रातों में मिश्री घुली सुनहरा लम्हा थमा हुआ सपना कागज़ का फूल यादों की धूल
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