धुंधला सा दुपट्टा
दीया (Diya)96 Wiedergaben
महल की भीगी दीवारें पुरानी वो सब पुकारें खिड़की पे बैठी अकेली सुलझाती यादों की पहेली बचपन का वो यार पुराना जैसे कोई भूला फसाना संगमरमर पे गिरती बूंदें तुझको ही हर कोना ढूँढे हवा में उड़ती पंखुड़ी सूखी मगर है जुड़ी ख्वाबों की रेशमी डोरी कहती है कोई चोरी सुनहरे जाल में समेटूँ बीते हर पल को देखूँ विरह में भी है सुकून जैसे कोई मीठा जुनून स्मृति की ये कोमल नरमी रूह में भरती है गर्मी सुनहरे जाल में समेटूँ बीते हर पल को देखूँ धीमी सी ये थाप खुद से ही मिलाप यादों का ये घेरा बस तेरा और मेरा हार्पसीकोर्ड की वो खनक जैसे पायल की झनक बांसुरी के हल्के स्वर भीगा हुआ मेरा घर पंप ऑर्गन की वो गूँज जैसे कोई मीठी पूँज सूखे गुलाब की महक मन में उठी एक चहक तारों की ये लहर ठहरा हुआ सा शहर आँखों में तैरते मंज़र जैसे कोई गहरा समंदर सुनहरे जाल में समेटूँ बीते हर पल को देखूँ विरह में भी है सुकून जैसे कोई मीठा जुनून स्मृति की ये कोमल नरमी रूह में भरती है गर्मी सुनहरे जाल में समेटूँ बीते हर पल को देखूँ पियानो की कोमल पुकार स्ट्रिंग्स का बहता सा प्यार अलंकारों की वो सजावट बिना किसी भी थकावट कोई वेदना नहीं यहाँ बस है मेरा ये जहाँ मीठी सी एक कसक चेहरे पे हल्की चमक सुनहरे जाल में बीते हर हाल में यादों के साए मुझको ये भाए सुनहरे जाल में समेटूँ बीते हर पल को देखूँ विरह में भी है सुकून जैसे कोई मीठा जुनून स्मृति की ये कोमल नरमी रूह में भरती है गर्मी सुनहरे जाल में समेटूँ बीते हर पल को देखूँ धीमी सी ये थाप खुद से ही मिलाप यादों का ये घेरा बस तेरा और मेरा
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