कोमल खलबल
दीया (Diya)48 次播放
बचपन की वो कोमल यादें मां की गोदी सा सुख हर ली तूने मेरी बाधा मिटा दिया सारा दुख छोटी सी मेरी वो भूलें तेरी क्षमा के वो झूले पकड़े हुए मेरी उंगली तूने दिखाया रस्ता अंधियारे से जब डरती थी तुझको ही याद करती थी तूने ही संभाला मुझे दीपक सा उजाला मुझे मेरे प्रभु मेरे राम तेरा ही पावन नाम ममता की शीतल छाया तूने ही मुझे बचाया सांसों का तू ही आधार भवसागर से कर दे पार चरणों में तेरे सुकून मिट जाए सारा भ्रम तेरा नाम सत्य धाम सुबह शाम आठों याम बीत गया वो बचपन सारा आया बुढ़ापे का घेरा अकेलापन जब डराए मन मेरा घबराए वही पुराना कोमल स्पर्श भर देता है मुझमें हर्ष तेरी याद जब आती है शांति हृदय छा जाती है संसार की ये माया झूठी है ये काया अंत में बस तू ही सत्य की है छाया कोई न दे साथ पकड़े रहना हाथ सांसों की ये माला नाम तेरा ही जपती भीतर की ये ज्वाला तुझमें ही है खपती छोटी छोटी चिंताएं अब तो दूर हो जाएं दिव्य नाम की वो ज्योति जैसे मन का मोती मेरे प्रभु मेरे राम तेरा ही पावन नाम ममता की शीतल छाया तूने ही मुझे बचाया सांसों का तू ही आधार भवसागर से कर दे पार चरणों में तेरे सुकून मिट जाए सारा भ्रम तेरा नाम सत्य धाम सुबह शाम आठों याम
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