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रात के दो बजे की ये खामोशियां भीगी सड़कों पे सोई परछाइयां कैफे की मेज पे बिखरी तन्हाइयां चाय की प्याली में डूबी रुसवाइयां जेब में दबा वो रेशमी दुपट्टा महक रहा है अब भी थोड़ा खट्टा वादे तो अपनी जगह पे खड़े रहे इंसान ही थे जो आगे बढ़ गए ये धुंधला सा समां ये खाली कारवां दर्द नहीं है अब बस एक धुआं सब कुछ धुंधला है दिल भी संभला है रात ही साथी है यही काफी है यही काफी है यही काफी है हल्की सी हंसी बाकी है खाली ग्लास को बस यूं ही घुमाना सीख लिया मैंने खुद को बहलाना गिटार की वो एक सुस्त सी तान जैसे मांग रही हो कोई दान हारमोनिका की वो ठंडी हवा दर्द ही अब तो बन गया दवा जेब में दबा वो रेशमी दुपट्टा महक रहा है अब भी थोड़ा खट्टा वादे तो अपनी जगह पे खड़े रहे इंसान ही थे जो आगे बढ़ गए ये धुंधला सा समां ये खाली कारवां दर्द नहीं है अब बस एक धुआं सब कुछ धुंधला है दिल भी संभला है रात ही साथी है यही काफी है सितार की वो धीमी सी एक लचक जैसे कोई पुरानी सी एक टीस पियानो की वो गिरती हुई बूँदें आंखें मूंदें, यादें ढूंढें अब कोई शिकवा नहीं है तुमसे रिश्ता टूटा है बस खुद ही खुद से लोग बदल जाते हैं वादे रह जाते हैं वक्त की धूल में सब खो जाते हैं ये धुंधला सा समां ये खाली कारवां दर्द नहीं है अब बस एक धुआं सब कुछ धुंधला है दिल भी संभला है रात ही साथी है यही काफी है
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