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सांध्य दीप

दीया (Diya)

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Текст

साँझ ढली नदिया के तीर
मन में जागी गहरी पीर
ठंडी हवा और पत्तों का शोर
भीनी महक उठी चारों ओर
घी की बाती जलती जाए
तेरी छवि नैनन में आए

दुनिया की उलझन छोड़ी है
डोर तुझसे ही जोड़ी है
सब कुछ अर्पण करने आई
तेरी शरण में सर झुकाई

छोटा सा ये दीया मेरा
हर ले प्रभु मन का अंधेरा
साँझ ढली नदिया के तीर
मन में जागी गहरी पीर
बस शांति दे दो भगवन
तुझको सौंप दिया ये जीवन

ओम नमो
शांति नमो
प्रभु नमो
दाता नमो

थोड़ी खट्टी थोड़ी मीठी बातें
काटी मैंने कितनी रातें
गृहस्थी के इस चक्र में खोई
कितनी बार मैं छुपकर रोई
सुख-दुख सब तेरे चरणों में
शांति मिले बस तेरी शरणों में

मिट्टी का ये कोमल गात
पकड़े रहना मेरा हाथ
लहरों पर दीपक बहता है
मन बस तेरा नाम कहता है

छोटा सा ये दीया मेरा
हर ले प्रभु मन का अंधेरा
साँझ ढली नदिया के तीर
मन में जागी गहरी पीर
बस शांति दे दो भगवन
तुझको सौंप दिया ये जीवन

दूर कहीं मंदिर की घंटी
गूँज रही है मन की घाटी
सारंगी के सुर ये कहते
आँसू पलकों से हैं बहते
तू ही सागर तू ही किनारा
तू ही मेरा एक सहारा

हाथ जोड़ ये विनती मेरी
भूलूँ न मैं सूरत तेरी
दिन भर की ये थकान उतारूँ
तुझको ही बस आज निहारूँ
नदिया की कल-कल में तू है
हृदय की हलचल में तू है

छोटा सा ये दीया मेरा
हर ले प्रभु मन का अंधेरा
साँझ ढली नदिया के तीर
मन में जागी गहरी पीर
बस शांति दे दो भगवन
तुझको सौंप दिया ये जीवन

ओम नमो
शांति नमो
प्रभु नमो
दाता नमो

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