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बचपन का सांवरा

दीया (Diya)

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Текст

रिमझिम बरसे सावन की बूंद
मन में गूंजे तेरी ही धुन
पुरानी देहरी भीगी सी माटी
बिछी बरामदे में बांस की चपाटी
तुलसी की माला फेर रही हूं
बीते दिनों को घेर रही हूं

धुंधली आंखों में यादें पुरानी
सुन ले कान्हा मेरी कहानी
वही सुबह है वही है पानी
बस मैं नहीं रही वो दीवानी

मैं तो वही छोटी ग्वालिन हूं
तेरे लिए माखन लाई हूं
कान्हा क्या मुझे पहचानोगे?
फिर से वही बच्चा मानोगे?
हां मैं वही छोटी ग्वालिन हूं
तेरे लिए माखन लाई हूं

राधे राधे जपती ये माला
कहाँ छुपा मेरा मुरली वाला
राधे राधे जपती ये माला
कहाँ छुपा मेरा मुरली वाला

बारिश के कीचड़ में सने वो पांव
वो छोटा मंदिर वो अपना गांव
पत्थर की मूरत से बातें करना
दुनिया के डर से कभी ना डरना
चोरी से मटकी फोड़ी थी मैंने
प्रीत की डोरी जोड़ी थी मैंने

सांवरे ओ मेरे सांवरे
आजा तू मन के मुंडेरे
सांवरे ओ मेरे सांवरे
आजा तू मन के मुंडेरे

अब तो ये काया बूढ़ी हुई है
पर ममता की गागर जुड़ी हुई है
हाथों में अब कंपन होता है
पर तुझमें ही ये मन खोता है
लाठी का अब साथ बचा है
पर बचपन का वो ठाठ बचा है

नटखट वो तेरी मुस्कान कहाँ है
मेरे हृदय का वो प्राण कहाँ है
आकर फिर से माखन चुरा ले
मुझको अपनी मैया बना ले
देर ना कर ओ नंद के लाला
खोल दे मेरे मन का ताला

मैं तो वही छोटी ग्वालिन हूं
तेरे लिए माखन लाई हूं
कान्हा क्या मुझे पहचानोगे?
फिर से वही बच्चा मानोगे?
हां मैं वही छोटी ग्वालिन हूं
तेरे लिए माखन लाई हूं

राधे राधे जपती ये माला
कहाँ छुपा मेरा मुरली वाला
राधे राधे जपती ये माला
कहाँ छुपा मेरा मुरली वाला

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