baroque pop

रेशमी स्मृतियाँ (Reshmi Smritiyon)

दीया (Diya)

77 воспр. · 0 в избранном · 4:50

Текст

चाँदनी खिड़की पे ठहरी है
महक चमेली की गहरी है
भीगी पंखुड़ियाँ चुप हैं
बीते लम्हे सब धूप हैं
हवेली की ये तन्हाई
जैसे कोई शहनाई

दादी की वो कहानियाँ
बचपन की सब निशानियाँ
लौट आई हैं आज यहाँ
खोया था मेरा जहाँ

रेशमी यादों का साया
मन ने जिसे है सजाया
ना कोई गिला ना शोर
स्मृतियों की ये डोर
मीठी सी एक टीस है
पुरानी ये कशिश है

(आ... आ... आ...)
(मद्धम सी ये सदा...)

पीतल का वो पानदान
रखा है बनके वरदान
सूखा गुलाब किताब में
डूबा किसी ख्वाब में
धूल की परतों के नीचे
वक़्त हमें पीछे खींचे

हवा में एक सरसराहट
पुरानी उस आहट की
दिल के बंद झरोखों में
एक नई सी सजावट की

रेशमी यादों का साया
मन ने जिसे है सजाया
ना कोई गिला ना शोर
स्मृतियों की ये डोर
मीठी सी एक टीस है
पुरानी ये कशिश है

दीवारों की नक्काशी
जैसे कोई प्यासी
झूमर की मद्धम रोशनी
भूली हुई कोई रागिनी
कांच सी ये ज़िंदगी
स्मृतियों की बंदगी

खामोशी में बातें हैं
ये भीगी सी रातें हैं
शिकवा नहीं ज़माने से
सुकून है याद आने से
खुद से ही मैं कहती हूँ
यादों में ही रहती हूँ

रेशमी यादों का साया
मन ने जिसे है सजाया
ना कोई गिला ना शोर
स्मृतियों की ये डोर
मीठी सी एक टीस है
पुरानी ये कशिश है

(आ... आ... आ...)
(रेशमी सी ये स्मृतियाँ...)

Комментарии (0)

0/500

Загрузка…

Похожие треки