blues jazz ballad

आखिरी चाय और बारिश

आरव (Aarav)

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Текст

स्टेशन की छत टपक रही है
चाय की प्याली अब ठंडी है
बीस साल का ये बोझ मेरा
आज जेब मेरी बिल्कुल खाली है
धुएँ में चेहरा दिखता नहीं
कोई रास्ता अब बिकता नहीं
पुरानी बेंच पर बैठा हूँ मैं
वक्त अब मुझसे टिकता नहीं

घर जाने की अब हिम्मत नहीं
किस्मत की भी कोई कीमत नहीं
अंधेरा गहरा होता जा रहा है
मेरा साया भी सोता जा रहा है

ये मेरी ही सब गलतियां हैं
कोई और यहाँ गुनहगार नहीं
वक्त की ये जो कड़वाहट है
अब इससे कोई इंकार नहीं
हाँ, ये मेरी ही गलतियां हैं
कोई और यहाँ गुनहगार नहीं

ठंडी बारिश, खाली हाथ
बीत रही है ये काली रात

वो बचपन का यार याद आया
जब पतंगें हम उड़ाते थे
बिना बात के हम हंसते थे
और बेफ़िक्र सो जाते थे
आज खुद पर हंसी आती है
ये तन्हाई अब काट खाती है
वो गैरज़िम्मेदार सी खुशियाँ मेरी
अब बस यादों में मुस्कुराती हैं

खाली पटरी, गहरा अंधेरा
कहाँ खो गया वो कल मेरा?
कहाँ खो गया वो कल मेरा?

किसी ने मुझे धोखा नहीं दिया
मैंने खुद को ही भुला दिया
मौज-मस्ती के वो दिन पुराने
बन गए हैं अब बस अफ़साने
ना कोई शिकवा, ना कोई गिला
जो बोया था, बस वही मिला

आखिरी सिक्का भी खर्च हुआ
मेरा सारा सच अब दर्ज हुआ
स्टेशन ही अब मेरा ठिकाना है
ना कहीं से आना, ना जाना है
एक ठंडी मुस्कान है चेहरे पर
सब छोड़ दिया मैंने लहरों पर
थक गया हूँ मैं चलते-चलते
सूरज को देखा है ढलते-ढलते

ये मेरी ही सब गलतियां हैं
कोई और यहाँ गुनहगार नहीं
वक्त की ये जो कड़वाहट है
अब इससे कोई इंकार नहीं
हाँ, ये मेरी ही गलतियां हैं
कोई और यहाँ गुनहगार नहीं

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