blues jazz ballad

चार बजे की धूल

आरव (Aarav)

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Paroles

दुकान का गिरा वो ताला
पीला सा ये उजाला
हाथ में ठंडी चाय का प्याला
सब कुछ ही धुंधला और काला
फुटपाथ पे बिछा है पाला
वक्त ने है मुझे पाला

दस साल की ये लंबी धूल
रास्ते में बस कांटे नहीं फूल
सब कुछ मैं गया हूँ अब भूल
किस्मत का ये कैसा है उसूल

जेब में बेटी की वो तस्वीर
फटी हुई मेरी ये तकदीर
दोस्त ने बदली अपनी लकीर
बन गया मैं खुद ही फकीर
हाँ मैं हूँ अब बे-तदबीर
भारी है ये गम की ज़ंजीर

चार बजे का ये सन्नाटा
वक्त ने है मुझे काटा
गम का मिला है बस आटा
ज़िंदगी ने मारा है चांटा

स्टेशन की वो दूर की सीटी
यादें जो कड़वी और मीठी
धोखे की वो लिखी हुई चिट्ठी
अरमानों पे गिर गई है मिट्टी
सांसें भी अब तो हैं टूटी
उम्मीद की वो डोर भी छूटी

खाली है मेरा ये सारा मकान
थक गया हूँ करके ये गुमान
बिक गया मेरा सारा सम्मान
अब तो बस खाली है ये आसमान

जेब में बेटी की वो तस्वीर
फटी हुई मेरी ये तकदीर
दोस्त ने बदली अपनी लकीर
बन गया मैं खुद ही फकीर
हाँ मैं हूँ अब बे-तदबीर
भारी है ये गम की ज़ंजीर

हंसता हूँ अपनी इन रातों पर
बीती हुई उन सब बातों पर
भरोसा नहीं अब मुलाकातों पर
ज़िंदगी के इन खाली हाथों पर
ज़हर घुला है अब जज्बातों पर
ताले लगे हैं अब ख्यालातों पर

जेब में बेटी की वो तस्वीर
फटी हुई मेरी ये तकदीर
दोस्त ने बदली अपनी लकीर
बन गया मैं खुद ही फकीर
हाँ मैं हूँ अब बे-तदबीर
भारी है ये गम की ज़ंजीर

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