acoustic ballad

धूप और यादें

आरव (Aarav)

63 воспр. · 0 в избранном · 4:23

Текст

धूल जमी है शीशे पर
धूप छन के आती है
थर्मस की वो गर्म चाय
भाप बन के उड़ती है
प्लेटफॉर्म की वो हलचल
कानों में गुनगुनाती है
चायवाले की वो आवाज़
नींद से मुझे जगाती है

घड़ी की सुई रुक सी गई
सांसों में एक हलचल नई
पुरानी डायरी के पन्ने
ढूंढते हैं वो चेहरा कहीं

तू आएगा शायद आज यहाँ
वही पुरानी हंसी लेकर
मिलेगा फिर से वही जहाँ
बीते कल की नमी लेकर
हाँ, तू आएगा
तू आएगा ही

वही पुरानी हंसी लेकर
वही पुरानी नमी लेकर

याद है वो स्कूल का बस्ता
तेरी बोतल से पानी चुराना
पुल से नदी में कंकड़ मारना
वो बेफिक्र सा जमाना
बिना टिकट उस डिब्बे में
छुपकर वो रात बिताना
पकड़े जाने के उस डर में
हंसते हुए घर को आना

वो दिन भी क्या दिन थे
वो पल भी क्या पल थे

फटे पन्नों पे लिखे नंबर
आधे अधूरे रह गए थे
वक़्त की इस तेज़ रफ़्तार में
शायद हम भी बह गए थे
पर आज ये इंतज़ार मीठा है
कोई शिकवा नहीं कोई गिला नहीं
बस एक शांत सी आस्था है
कि तू अब तक बदला नहीं

दूर से सीटी गूंजी है
पटरी पर इक सरसराहट है
दिल की धड़कन बढ़ सी गई
शायद तेरी ही आहट है
सेलो की गूंज हवाओं में
एक धीमी सी मुस्कुराहट है
तू सामने खड़ा होगा अब
बस इसी बात की राहत है

तू आएगा शायद आज यहाँ
वही पुरानी हंसी लेकर
मिलेगा फिर से वही जहाँ
बीते कल की नमी लेकर
हाँ, तू आएगा
तू आएगा ही

वही पुरानी हंसी लेकर
वही पुरानी नमी लेकर

धूप अब ढलने लगी है
पर उम्मीद जलने लगी है
स्टेशन का वो कोना
जहाँ हमें फिर से है होना

Комментарии (0)

0/500

Загрузка…

Похожие треки