कुल्हड़ की राख
आरव (Aarav)20 plays
बंद दुकान का ये शटर भीग रहा है मेरा शहर हाथ में फटी एक पर्ची ख्वाहिशें जो थीं बेअर्जी स्याही अब ये फैल रही बातें दिल की कह रही हिसाब पुराना बाकी है एक याद ही काफी है भीगते इस अंधेरे में तू अब भी मुझमें बाकी है दूध में चीनी अब ज़्यादा है जीने का यही तो आधा है छतरी घर पर ही भूल गया तेरा ही रंग मुझपे खुल गया कोई गिला नहीं है तुमसे तुम बस गए हो मुझमें हाँ तुम बस गए हो मुझमें चीनी ज़्यादा है आधा वादा है बारिश भीनी है चाय पीनी है किराने की वो गली जहाँ धूप कम थी खिली थैला मैं पकड़े खड़ा तूने जो सामान पढ़ा दाल और वो नमक के पैकेट भीगा हुआ मेरा जैकेट वो छोटी सी हर एक बात रह गई अब मेरे साथ हिसाब पुराना बाकी है एक याद ही काफी है भीगते इस अंधेरे में तू अब भी मुझमें बाकी है दूध में चीनी अब ज़्यादा है जीने का यही तो आधा है छतरी घर पर ही भूल गया तेरा ही रंग मुझपे खुल गया कोई गिला नहीं है तुमसे तुम बस गए हो मुझमें हाँ तुम बस गए हो मुझमें सेलो की वो मंद सी छाया कैसी ये तूने धूप खिलाया अकेला हूँ पर तन्हा नहीं कोई और अब तमन्ना नहीं स्वीकार है ये अधूरापन तू ही है मेरा सारा जीवन सुनो शायद तुम अब बदल गए हो किसी नए रास्ते निकल गए हो पर मैं आज भी वही करता हूँ उन्हीं पुरानी बातों से भरता हूँ बिना छतरी के भीगना अच्छा है ये मेरा पागलपन ही सच्चा है दूध का वो मीठा सा स्वाद दिलाता है बस तेरी ही याद दूध में चीनी अब ज़्यादा है जीने का यही तो आधा है छतरी घर पर ही भूल गया तेरा ही रंग मुझपे खुल गया कोई गिला नहीं है तुमसे तुम बस गए हो मुझमें हाँ तुम बस गए हो मुझमें चीनी ज़्यादा है आधा वादा है बारिश भीनी है चाय पीनी है
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