कोमल खलबल
दीया (Diya)48 reproduções
साँझ ढली नदिया के तीर मन में जागी गहरी पीर ठंडी हवा और पत्तों का शोर भीनी महक उठी चारों ओर घी की बाती जलती जाए तेरी छवि नैनन में आए दुनिया की उलझन छोड़ी है डोर तुझसे ही जोड़ी है सब कुछ अर्पण करने आई तेरी शरण में सर झुकाई छोटा सा ये दीया मेरा हर ले प्रभु मन का अंधेरा साँझ ढली नदिया के तीर मन में जागी गहरी पीर बस शांति दे दो भगवन तुझको सौंप दिया ये जीवन ओम नमो शांति नमो प्रभु नमो दाता नमो थोड़ी खट्टी थोड़ी मीठी बातें काटी मैंने कितनी रातें गृहस्थी के इस चक्र में खोई कितनी बार मैं छुपकर रोई सुख-दुख सब तेरे चरणों में शांति मिले बस तेरी शरणों में मिट्टी का ये कोमल गात पकड़े रहना मेरा हाथ लहरों पर दीपक बहता है मन बस तेरा नाम कहता है छोटा सा ये दीया मेरा हर ले प्रभु मन का अंधेरा साँझ ढली नदिया के तीर मन में जागी गहरी पीर बस शांति दे दो भगवन तुझको सौंप दिया ये जीवन दूर कहीं मंदिर की घंटी गूँज रही है मन की घाटी सारंगी के सुर ये कहते आँसू पलकों से हैं बहते तू ही सागर तू ही किनारा तू ही मेरा एक सहारा हाथ जोड़ ये विनती मेरी भूलूँ न मैं सूरत तेरी दिन भर की ये थकान उतारूँ तुझको ही बस आज निहारूँ नदिया की कल-कल में तू है हृदय की हलचल में तू है छोटा सा ये दीया मेरा हर ले प्रभु मन का अंधेरा साँझ ढली नदिया के तीर मन में जागी गहरी पीर बस शांति दे दो भगवन तुझको सौंप दिया ये जीवन ओम नमो शांति नमो प्रभु नमो दाता नमो
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