bhajan

समर्पण की छाँव

आरव (Aarav)

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歌詞

दोपहर की धूप है
बरगद की छाँव है
शिव का ये द्वार है
मेरा छोटा गाँव है
घंटे की गूँज में
मन ये खो गया
तेरा ही हो गया
सब शांत हो गया

चंदन की खुशबू महकी
हवा भी जैसे बहकी
चरणों में शीश झुकाया
मैंने अपना सब कुछ पाया

हे भोले नाथ
पकड़ लो हाथ
बिना मांगे दिया सब
तेरा ही साथ
मिट गए सब पाप
जपूँ तेरा जाप
ओ मेरे शम्भू
जपूँ तेरा जाप

ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय
तेरी शरण में
मन चैन पाय

बचपन की वो गलियाँ
तेरी दी हुई खुशियाँ
अनजाने में हुई भूल
बना लो चरणों की धूल
दुःख मेरे हर लिए
सुख से दामन भर दिए
तूने ही तो पाला
ओ डमरू वाला

शीतल सी ये पवन है
पावन मेरा मन है
अब कोई डर नहीं है
खाली ये घर नहीं है

हे भोले नाथ
पकड़ लो हाथ
बिना मांगे दिया सब
तेरा ही साथ
मिट गए सब पाप
जपूँ तेरा जाप
ओ मेरे शम्भू
जपूँ तेरा जाप

आँखों में आँसू हैं
हाथ मेरे खाली हैं
फिर भी मैं धनी हूँ
तू ही तो माली है
अटूट ये विश्वास है
तू मेरे आस-पास है
तू ही तो प्रकाश है
तू ही मेरा आकाश है

नहीं कोई इच्छा
नहीं कोई मांग है
बस तेरी भक्ति का
चढ़ा ये रंग है
हर सांस में तेरा नाम
तुझ में ही चारों धाम
तेरी ही माया
तू ही तो साया
सब कुछ समर्पित
तुझको ये अर्पित

हे भोले नाथ
पकड़ लो हाथ
बिना मांगे दिया सब
तेरा ही साथ
मिट गए सब पाप
जपूँ तेरा जाप
ओ मेरे शम्भू
जपूँ तेरा जाप

ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय
तेरी शरण में
मन चैन पाय

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