नम मिट्टी की महक
आरव (Aarav)10 riproduzioni
स्टेशन की छत टपक रही है चाय की प्याली अब ठंडी है बीस साल का ये बोझ मेरा आज जेब मेरी बिल्कुल खाली है धुएँ में चेहरा दिखता नहीं कोई रास्ता अब बिकता नहीं पुरानी बेंच पर बैठा हूँ मैं वक्त अब मुझसे टिकता नहीं घर जाने की अब हिम्मत नहीं किस्मत की भी कोई कीमत नहीं अंधेरा गहरा होता जा रहा है मेरा साया भी सोता जा रहा है ये मेरी ही सब गलतियां हैं कोई और यहाँ गुनहगार नहीं वक्त की ये जो कड़वाहट है अब इससे कोई इंकार नहीं हाँ, ये मेरी ही गलतियां हैं कोई और यहाँ गुनहगार नहीं ठंडी बारिश, खाली हाथ बीत रही है ये काली रात वो बचपन का यार याद आया जब पतंगें हम उड़ाते थे बिना बात के हम हंसते थे और बेफ़िक्र सो जाते थे आज खुद पर हंसी आती है ये तन्हाई अब काट खाती है वो गैरज़िम्मेदार सी खुशियाँ मेरी अब बस यादों में मुस्कुराती हैं खाली पटरी, गहरा अंधेरा कहाँ खो गया वो कल मेरा? कहाँ खो गया वो कल मेरा? किसी ने मुझे धोखा नहीं दिया मैंने खुद को ही भुला दिया मौज-मस्ती के वो दिन पुराने बन गए हैं अब बस अफ़साने ना कोई शिकवा, ना कोई गिला जो बोया था, बस वही मिला आखिरी सिक्का भी खर्च हुआ मेरा सारा सच अब दर्ज हुआ स्टेशन ही अब मेरा ठिकाना है ना कहीं से आना, ना जाना है एक ठंडी मुस्कान है चेहरे पर सब छोड़ दिया मैंने लहरों पर थक गया हूँ मैं चलते-चलते सूरज को देखा है ढलते-ढलते ये मेरी ही सब गलतियां हैं कोई और यहाँ गुनहगार नहीं वक्त की ये जो कड़वाहट है अब इससे कोई इंकार नहीं हाँ, ये मेरी ही गलतियां हैं कोई और यहाँ गुनहगार नहीं
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