सरल विनती
दीया (Diya)27 बजाव
भोर की बेला ठंडी पवन जागा है देखो सूना आँगन कुलदेवी माँ तेरी शरण अर्पण करूँ मैं अपना ये मन दीपक जलाया आस जगी है तुझसे ही माँ लगन लगी है मैया मेरी सुन ले पुकार आँचल में तेरे सारा संसार छोटा सा दीपक लाया है प्यार मैया मेरी सुन ले पुकार जय माँ भवानी मैया मेरी जय माँ भवानी मैया मेरी याद है मुझको वो बचपन सारा तेरी गोद का मिठा सहारा पकड़ के उँगली चलना सिखाया हर इक डर से तूने बचाया आज भी मैं तो बच्ची ही हूँ तेरी नज़र में कच्ची ही हूँ मैया मेरी सुन ले पुकार आँचल में तेरे सारा संसार छोटा सा दीपक लाया है प्यार मैया मेरी सुन ले पुकार घर के कोने खुशियों से भर दे सबकी झोली ममता से भर दे कोई न रूठे कोई न छूटे अपना ये नाता कभी न टूटे मन की ये बातें तुझसे ही कहना सदा हमारे अंगना में रहना जैसे माँ बेटी करती हैं बातें कट जाएँ हँसते दिन और रातें मैया मेरी सुन ले पुकार आँचल में तेरे सारा संसार छोटा सा दीपक लाया है प्यार मैया मेरी सुन ले पुकार जय माँ भवानी मैया मेरी जय माँ भवानी मैया मेरी
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