भीगी यादें और चाय
दीया (Diya)93 बजाव
नदी किनारे हाट लगा है मीठी जलेबी का स्वाद जगा है दूर कहीं से ढोल पुकारे आ जाओ सब नदियाँ के किनारे छोड़ो सारे काम की बातें होगी आज बस शाम की बातें धूल उड़े और शोर मचेगा नाच का ऐसा दौर चलेगा घड़ी की सुइयाँ आज भुला दो धड़कन को ज़रा और बढ़ा दो अजनबी भी अब यार लगेंगे सारे चेहरे गुलज़ार लगेंगे मेला रे मेला रे खुशियों का ये मेला रे झूमो रे झूमो रे हो के ज़रा मनचला रे मेला रे मेला रे साथ में तू भी गा रे झूमो रे झूमो रे आज का दिन तेरा रे (हे या हे या!) (धिन-तक-धिन!) (ओ ला ला!) (सब साथ में!) नाचेंगे हम बेपरवाह झूमेंगे हम बेपरवाह जी लेंगे हम बेपरवाह बेपरवाह हाँ बेपरवाह नीले पीले गुब्बारे हवा में जादू जैसा कुछ घुला फ़ज़ा में हाथों में है मिट्टी की खुशबू दिल पर अब रहा नहीं काबू दुकानों की वो लंबी कतारें हँसती गाती ये ठंडी बहारें सबका अपना एक ही तराना आज नहीं है वापस जाना शोर में अपनी धुन को सजा लो पाँव की बेड़ी आज हटा लो अजनबी भी अब यार लगेंगे सारे चेहरे गुलज़ार लगेंगे मेला रे मेला रे खुशियों का ये मेला रे झूमो रे झूमो रे हो के ज़रा मनचला रे मेला रे मेला रे साथ में तू भी गा रे झूमो रे झूमो रे आज का दिन तेरा रे न कोई कल है न कोई गम है आज के राजा तो बस हम हैं ब्रास की गूँज और तबले की थाप मिट जाए दिल के सारे संताप थपकी पे थिरकेंगे सब यहाँ खुशियों का है ये नया जहाँ नाचो नाचो सब साथ में नाचो रंगों की इस रात में नाचो (हे या हे या!) (धिन-तक-धिन!) (ओ ला ला!) (सब साथ में!) मेला रे मेला रे खुशियों का ये मेला रे झूमो रे झूमो रे हो के ज़रा मनचला रे मेला रे मेला रे साथ में तू भी गा रे झूमो रे झूमो रे आज का दिन तेरा रे नाचेंगे हम बेपरवाह झूमेंगे हम बेपरवाह जी लेंगे हम बेपरवाह बेपरवाह हाँ बेपरवाह
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