blues jazz ballad

कुल्हड़ की राख

आरव (Aarav)

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Paroles

टीन की छत पे गिरती बूंदें
सुलगती रात की गहरी यादें
भीगी हवा की ये सरगोशियाँ
पी ली मैंने सारी मदहोशियाँ

जेब में फटी एक तस्वीर
खिंचती वक्त की ये लकीर
धुंधला सा वो एक चेहरा है
दर्द ये थोड़ा गहरा है

धुएँ में लिपटी ये खामोशी
ढूँढती फिरती है मदहोशी
दोस्त जो कहते थे साथ रहेंगे
अब वो अजनबी बनके बहेंगे

कुल्हड़ में चाय ठंडी है
किस्मत ये थोड़ी मंदी है
कोई गिला नहीं बस दूरी है
ज़िंदगी आज भी अधूरी है

अधूरी है
हाँ ये अधूरी है

गली में पीली लाइट जलती
साये के पीछे शाम ढलती
वादे तो सबने किए थे प्यारे
टूट गए वो बनके सितारे
वक्त की धूल ने सब मिटाया
अपना भी कोई नज़र न आया

हारमोनिका की वो धीमी तान
जैसे मांग रही हो कोई दान
रिश्ते तो बस एक मौसम थे
हम ही शायद थोड़े कम थे
धोखा नहीं बस ये मोड़ था
हाथों से छूटा वो छोर था

कुल्हड़ में चाय ठंडी है
किस्मत ये थोड़ी मंदी है
कोई गिला नहीं बस दूरी है
ज़िंदगी आज भी अधूरी है

सिगरेट भी अब बुझ चुकी है
आग ये अंदर सुलग उठी है
तस्वीर के चेहरे धुंधले हैं
ज़हन के परदे गंदे हैं
मुस्कुरा के इसे रख देता हूँ
खामोशी को अब चख लेता हूँ

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