फ्लोर का शोर (Floor Ka Shor)
आरव (Aarav)33 écoutes
सांझ ढली नदिया के तीर पीपल की शीतल है छांव मन में जागी एक पीर तेरे ही द्वारे आए पांव धुंधली सी ये शाम है मुख पे तेरा नाम है तूने सदा ही संभाला है हर मुश्किल से निकाला है बिन बोले सब जान लिया मुझको अपना मान लिया तेरी कृपा का अंत नहीं तुझसा कोई संत नहीं मैं तो बस इक धूल हूं तेरे चरणों का फूल हूं प्रभु मेरे दाता मेरे सब तुझको अर्पण है ओम नमो नारायणा ओम नमो नारायणा बीते वर्षों की वो यादें अधूरी सी वो फरियादें जब मैं अकेला रोया था धीरज अपना खोया था तब तूने हाथ बढ़ाया था चुपके से राह दिखाया था वो अनकही सी बातें सब तूने सुनी थी मेरी तब कोई न था जब पास मेरे तू ही था विश्वास मेरे तेरी कृपा का अंत नहीं तुझसा कोई संत नहीं मैं तो बस इक धूल हूं तेरे चरणों का फूल हूं प्रभु मेरे दाता मेरे सब तुझको अर्पण है दीपक की ये लौ जलती पवन से पत्तियां सरकती तुलसी की माला गले सजी मन में तेरी बीन बजी नदिया के शीतल छींटे हैं दुख के कांटे अब छंटे हैं अब न कोई चाह बाकी है तू ही मेरी राह बाकी है संन्यासी सा ये मन मेरा ढूंढे बस दर्शन तेरा गर्व नहीं अब हार हूं मैं तेरा ही विस्तार हूं तज दिया सब मोह माया तेरी शरण में सुख पाया तेरी कृपा का अंत नहीं तुझसा कोई संत नहीं मैं तो बस इक धूल हूं तेरे चरणों का फूल हूं प्रभु मेरे दाता मेरे सब तुझको अर्पण है ओम नमो नारायणा ओम नमो नारायणा
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