भीगे पत्थर की राख
आरव (Aarav)15 reproducciones
भीगे पत्थरों की सोंधी खुशबू पीली बत्ती की धुंधली आरज़ू स्टेशन की ये ठंडी रात कोई नहीं है अब मेरे साथ सन्नाटा ही मेरी ज़ात अब क्या करेंगे हम बात? जेब में आधी जली वो बीड़ी थकान की चढ़ी है ऊंची सीढ़ी सांसों में भारीपन का शोर टूटा है उम्मीद का हर छोर खाली हाथ आए थे भाई खाली हाथ ही जाना है शहर ने दी कैसी रुसवाई ये ही मेरा ठिकाना है सपनों की अर्थी उठाई अब बस गम को मनाना है मालगाड़ी की वो दूर की सीटी जैसे कोई पुरानी कहानी बीती लोहे की पटरियों का ये सोग भूल गए हमें शहर के लोग कमरतोड़ मेहनत का वो मंज़र अपनों ने ही घोंपा है खंज़र खून पसीना मिट्टी में मिला किस्मत से अब क्या ही गिला रिश्तों का निकला है दिवाला अंधेरा ही बन गया उजाला टूटे जूतों के गहरे निशान सुनसान पड़ा है ये जहान हड्डियों में अब दर्द का डेरा दूर है बहुत अब सवेरा खाली हाथ आए थे भाई खाली हाथ ही जाना है शहर ने दी कैसी रुसवाई ये ही मेरा ठिकाना है सपनों की अर्थी उठाई अब बस गम को मनाना है हारमोनियम की धीमी सी तान थक गया है मेरा ये ईमान कोई गिला नहीं कोई शिकवा नहीं ज़िंदगी में अब कोई अफ़वाह नहीं दुख को दोस्त बना लिया हमने खुद को ही मिटा लिया हमने वक्त ने चेहरे पे लकीरें दीं ज़िंदगी ने बस ज़ंजीरें दीं अब ये अंधेरा ही अपना है सच हुआ हर कड़वा सपना है मजदूरी में उम्र तमाम हुई ज़िंदगी की अब शाम हुई खाली हाथ आए थे भाई खाली हाथ ही जाना है शहर ने दी कैसी रुसवाई ये ही मेरा ठिकाना है सपनों की अर्थी उठाई अब बस गम को मनाना है खाली हाथ बिल्कुल खाली हाथ यही है बस मेरी बिसात यही है मेरी औकात
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