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सरल विनती

दीया (Diya)

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Liedtext

सूरज की पहली किरणें
नदी की शीतल लहरें
तुलसी के द्वारे आई
मैंने दीप ज्योत जलाई
जल की धार चढ़ाऊँ
तेरा ही नाम ध्याऊँ
मन को शांत बनाऊँ
तुझमें ही खो जाऊँ

छोटी सी मेरी अरज है
तू ही मेरा हम-गरज है
क्षमा कर दो मेरी भूल
बना लो चरणों की धूल

प्रभु मेरी विनती सुन लो
अभिमान मन का चुन लो
सेवा ही मेरी भक्ति हो
प्रेम ही मेरी शक्ति हो
प्रभु मेरी विनती सुन लो
अभिमान मन का चुन लो

मेरे राम मेरे श्याम
सुबह शाम तेरा नाम
मेरे राम मेरे श्याम
सुबह शाम तेरा नाम

छोटे से पंछी प्यारे
सब हैं तेरे ही तारे
सब में तुझे मैं देखूँ
सब की सेवा मैं लेखूँ
हाथ किसी का न छूटे
विश्वास कभी न टूटे
करुणा का अमृत बरसे
कोई न प्यार को तरसे

नहीं चाहिए कोई धाम
बस जपती रहूँ तेरा नाम
नहीं माँगूँ कोई वरदान
बनूँ मैं बस एक इंसान
दुख में मैं धीरज पाऊँ
सुख में न तुझे भुलाऊँ

प्रभु मेरी विनती सुन लो
अभिमान मन का चुन लो
सेवा ही मेरी भक्ति हो
प्रेम ही मेरी शक्ति हो
प्रभु मेरी विनती सुन लो
अभिमान मन का चुन लो

मृदुल पवन जो आए
तेरी ही महिमा गाए
मन का ये मैल धुला दे
मुझको खुद से मिला दे

कण-कण में तेरा वास
मन में है यही विश्वास
अहंकार मेरा मिट जाए
तेरा नूर ही बस छा जाए
झुक कर शीश नवाऊँ
जीवन सफल बनाऊँ

प्रभु मेरी विनती सुन लो
अभिमान मन का चुन लो
सेवा ही मेरी भक्ति हो
प्रेम ही मेरी शक्ति हो
प्रभु मेरी विनती सुन लो
अभिमान मन का चुन लो

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