भीगे औजार
आरव (Aarav)96 تشغيل
भीगे हुए पत्थर ठंडी ये हवा बंद चाय की दुकान खाली ये जगह आधी रात की बारिश भीगा है बदन अपने ही शहर में खोया है मन धुँधली सी लाइट कांपते हैं हाथ कोई नहीं सुनता मेरे दिल की बात वक्त ने छीना जो भी था मेरा अंधेरा ही अंधेरा बस अंधेरा ये टूटे हुए सपने ये झूठे सब अपने मैं अकेला खड़ा बस अंधेरा सब धुआँ है सब फना है टूटी ये छतरी गिरती है बूंद जेब में फटी फोटो आँखें हैं मूंद जिनको यार कहा वो बदल गए ख्वाबों के शीशे सब कुचल गए ठंडी है चाय कड़वी है याद अब किससे करूँ मैं कोई फरियाद वक्त ने छीना जो भी था मेरा अंधेरा ही अंधेरा बस अंधेरा ये टूटे हुए सपने ये झूठे सब अपने मैं अकेला खड़ा बस अंधेरा हाथों की लकीरें अब मिटने लगीं मजदूरी की उम्र अब घटने लगी शहर वही है पर मैं अजनबी हार गया मैं अपनी ही ज़िंदगी दूर कहीं बजता वो सैक्सोफोन मेरा इस दुनिया में बता दे है कौन चाय की वो महक रुलाती है अब मिट्टी की ये गंध सुलाती है अब वक्त ने छीना जो भी था मेरा अंधेरा ही अंधेरा बस अंधेरा ये टूटे हुए सपने ये झूठे सब अपने मैं अकेला खड़ा बस अंधेरा सब धुआँ है सब फना है सब धुआँ है बस अंधेरा
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