भीगे पत्थर की राख
आरव (Aarav)15 lượt phát
दुकान का गिरा वो ताला पीला सा ये उजाला हाथ में ठंडी चाय का प्याला सब कुछ ही धुंधला और काला फुटपाथ पे बिछा है पाला वक्त ने है मुझे पाला दस साल की ये लंबी धूल रास्ते में बस कांटे नहीं फूल सब कुछ मैं गया हूँ अब भूल किस्मत का ये कैसा है उसूल जेब में बेटी की वो तस्वीर फटी हुई मेरी ये तकदीर दोस्त ने बदली अपनी लकीर बन गया मैं खुद ही फकीर हाँ मैं हूँ अब बे-तदबीर भारी है ये गम की ज़ंजीर चार बजे का ये सन्नाटा वक्त ने है मुझे काटा गम का मिला है बस आटा ज़िंदगी ने मारा है चांटा स्टेशन की वो दूर की सीटी यादें जो कड़वी और मीठी धोखे की वो लिखी हुई चिट्ठी अरमानों पे गिर गई है मिट्टी सांसें भी अब तो हैं टूटी उम्मीद की वो डोर भी छूटी खाली है मेरा ये सारा मकान थक गया हूँ करके ये गुमान बिक गया मेरा सारा सम्मान अब तो बस खाली है ये आसमान जेब में बेटी की वो तस्वीर फटी हुई मेरी ये तकदीर दोस्त ने बदली अपनी लकीर बन गया मैं खुद ही फकीर हाँ मैं हूँ अब बे-तदबीर भारी है ये गम की ज़ंजीर हंसता हूँ अपनी इन रातों पर बीती हुई उन सब बातों पर भरोसा नहीं अब मुलाकातों पर ज़िंदगी के इन खाली हाथों पर ज़हर घुला है अब जज्बातों पर ताले लगे हैं अब ख्यालातों पर जेब में बेटी की वो तस्वीर फटी हुई मेरी ये तकदीर दोस्त ने बदली अपनी लकीर बन गया मैं खुद ही फकीर हाँ मैं हूँ अब बे-तदबीर भारी है ये गम की ज़ंजीर
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