गीली रेत का सुकून
आरव (Aarav)86 การเล่น
बारिश की ये बूंदें बालकनी में हम अकेले चाय की वो भाप यादों के हैं मेले ठंडी है ये हवा पर्दे हिल रहे हैं खामोश से हम खुद से मिल रहे हैं मिट्टी की वो खुशबू सांसों में समाई है बीते उन दिनों की चिट्ठी कोई आई है संकरी सी वो सड़कें पहाड़ों की वो शाम दोस्तों की वो बातें चाय का वो नाम बिना मकसद की सैर वो छोटा सा गांव सुकून भरा सफर पेड़ों की वो छांव कोई गिला नहीं बस एक सुकून है यादों का ये रंग कितना हसीन है फटी पुरानी किताब सूखा हुआ गुलाब पन्नों में छुपा एक मीठा सा ख्वाब माचिस की वो लौ कप को रोशन करती पुरानी वो हंसी होठों पे है फिरती छत पे टपकता पानी संगीत सुनाता है वक्त का वो हिस्सा करीब ले आता है संकरी सी वो सड़कें पहाड़ों की वो शाम दोस्तों की वो बातें चाय का वो नाम बिना मकसद की सैर वो छोटा सा गांव सुकून भरा सफर पेड़ों की वो छांव नर्म सी यादें हैं हथेली पे रखी जैसे कोई कहानी अधूरी सी लिखी पछतावा नहीं कोई बस एक संतोष है धीमी सी ये लय मीठा सा होश है गांव की वो दुकान धुंधला सा वो मंजर यादों का ये दरिया बहता है जो अंदर वक्त ठहर गया है बूंदों के बहाने हम खो गए फिर से उन्हीं बीते ज़माने संकरी सी वो सड़कें पहाड़ों की वो शाम दोस्तों की वो बातें चाय का वो नाम बिना मकसद की सैर वो छोटा सा गांव सुकून भरा सफर पेड़ों की वो छांव कोई गिला नहीं बस एक सुकून है यादों का ये रंग कितना हसीन है
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