bengali folk

मन का पंछी

आरव (Aarav)

82 การเล่น · 0 รายการโปรด · 4:22

เนื้อเพลง

नदिया किनारे धूप खिली है
पीपल की छाया ठंडी मिली है
एकतारा बोले टिन-टिन-तारा
मिल गया मुझको रस्ता प्यारा
पाँव में धूल है मन में चैन
खुली हुई हैं अंदर की नैन

गुबगुबी बोले धप-धप-धाय
मन मेरा बस यही गुनगुनाए
खोज रहा जो तू गलियों में
वो तो खिला है इन कलियों में

ओ रे मनवा तू कहाँ जाए?
अपने ही भीतर अलख जगाए
माटी की खुशबू मृदंग की थाप
साथ है मेरे मेरा ही आप
ओ रे मनवा तू कहाँ जाए?
अपने ही भीतर अलख जगाए

टिन-टिन-तारा
टिन-टिन-तारा
मन का पंछी
सबसे न्यारा

झोली से निकला गुड़ का टुकड़ा
जैसे हो कोई चाँद का मुखड़ा
बच्चों की टोली हँसना-गाना
भूल गया मैं सारा ज़माना
सरल है जीवन सरल है बात
हाथ में थामे कुदरत का हाथ

बाँसुरी गाए विरह की तान
सुनता है मेरा अपना ही प्राण
दूरी नहीं है कोई यहाँ
बसा है मुझमें सारा जहाँ

ओ रे मनवा तू कहाँ जाए?
अपने ही भीतर अलख जगाए
माटी की खुशबू मृदंग की थाप
साथ है मेरे मेरा ही आप
ओ रे मनवा तू कहाँ जाए?
अपने ही भीतर अलख जगाए

काया है एक कच्चा घड़ा
साँसों का धागा इसमें पड़ा
पक्षी उड़ेगा पिंजरा छोड़
माया के सारे बंधन तोड़
खोज न बाहर देख तू अंदर
बूंद में ही है सात समुंदर

दोतारा छेड़े मीठी सी धुन
आत्मा की तू आवाज़ सुन
नदी की लहरें करती पुकार
यहीं खड़ा है वो साहिल पार
गुड़ की मिठास सा सादा है सच
बाकी तो सारा झूठा है प्रपंच

ओ रे मनवा तू कहाँ जाए?
अपने ही भीतर अलख जगाए
माटी की खुशबू मृदंग की थाप
साथ है मेरे मेरा ही आप
ओ रे मनवा तू कहाँ जाए?
अपने ही भीतर अलख जगाए

टिन-टिन-तारा
टिन-टिन-तारा
मन का पंछी
सबसे न्यारा

ความคิดเห็น (0)

0/500

กำลังโหลด…

แทร็กที่เกี่ยวข้อง