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धूप और चिट्ठियाँ

दीया (Diya)

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Текст

गीली ये हवाएँ
रेशमी सदायें
धूप की किरण है
मन ये मगन है
बालकनी की मेज़ पर
यादें हैं बिखरी हुई
चाय की प्याली
अभी है भरी हुई

कागज़ पुराना
किस्सा सुहाना
स्याही की लकीरें
पुरानी वो तस्वीरें
धड़कन की ये लय
जैसे कोई विस्मय

वो अधूरी कहानी
जैसे बहता पानी
सुकून दे जाती है
पास ले आती है
चिट्ठियों का ये सफ़र
रुक गया है वक्त मगर
मीठी सी ये दूरी
इश्क़ की मज़बूरी

हल्की सी उदासी
मन की ये प्यासी
साँसों में घुली
बातें अनकही

कबासा की धड़कन
गिटार का ये गूँजन
तुम्हारी वो बातें
जागी हुई रातें
हाथों की वो लिखावट
जैसे कोई सजावट
पन्नों की वो महक
जैसे कोई चहक

हल्की सी ठंडक
बीती वो दस्तक
दिल की ये ज़मीन
लगती है हसीन
रंगों की ये फुहार
जैसे पहला प्यार

वो अधूरी कहानी
जैसे बहता पानी
सुकून दे जाती है
पास ले आती है
चिट्ठियों का ये सफ़र
रुक गया है वक्त मगर
मीठी सी ये दूरी
इश्क़ की मज़बूरी

खमाज का ये सुर
दूरी हो गई दूर
साँसों में बसी है
एक अनकही हंसी है
अधूरापन प्यारा है
यही तो सहारा है
नूर की ये बारिश
दिल की ये गुज़ारिश

वो अधूरी कहानी
जैसे बहता पानी
सुकून दे जाती है
पास ले आती है
चिट्ठियों का ये सफ़र
रुक गया है वक्त मगर
मीठी सी ये दूरी
इश्क़ की मज़बूरी

हल्की सी उदासी
मन की ये प्यासी
साँसों में घुली
बातें अनकही

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