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भीगी यादें और चाय

दीया (Diya)

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Текст

शहर की ये बारिश
भीगी सी गुजारिश
टपरी की वो चाय
तू अचानक मिल जाए
वही पुरानी हँसी
चेहरे पे है फँसी
जैसे कल की बात हो
तू मेरे साथ हो

धुंधली सी वो तस्वीर
बदल गई तकदीर
पर दिल तो वही है
बचपन ही सही है
खुल के तू मुस्कुरा
गम सारे तू भुला

आ चल भीग लें
यारी सीख लें
बारिश में झूम के
आसमान चूम के
नाचें बेफिक्र
तेरा मेरा ज़िक्र
ये मौसम है अपना
जैसे कोई सपना

(शहनाई धुन...)
छप-छप पानी में
नई कहानी में
(शहनाई धुन...)
झूमेंगे साथ में
भीगी सी रात में

वो भारी सा बस्ता
वो टेढ़ा सा रस्ता
आधी रोटी बाँटी
वो टीचर की डाँटी
कागज़ की कश्ती
बेहिसाब मस्ती
यूनिफॉर्म के दाग
यादों के वो बाग

तू मेरी पक्की वाली
दुनिया से है निराली
तू मेरी पक्की वाली
किस्मत से मिलने वाली

भीगा है ये शहर
यादों की है लहर
खुल के तू मुस्कुरा
गम सारे तू भुला

आ चल भीग लें
यारी सीख लें
बारिश में झूम के
आसमान चूम के
नाचें बेफिक्र
तेरा मेरा ज़िक्र
ये मौसम है अपना
जैसे कोई सपना

वक़्त की इस दौड़ में
मशीनी इस शोर में
तूने मुझे ढूँढा
मैंने तुझे पाया
धूप में भी जैसे
ठंडी सी एक छाया
तू ही मेरी यारा
तू ही है सहारा

(तबला और ढोलक की थाप)
(सिंथ बास की लहर)
एक दो तीन चार
नाचो अबकी बार

आ चल भीग लें
यारी सीख लें
बारिश में झूम के
आसमान चूम के
नाचें बेफिक्र
तेरा मेरा ज़िक्र
ये मौसम है अपना
जैसे कोई सपना

(शहनाई धुन...)
छप-छप पानी में
नई कहानी में
(शहनाई धुन...)
झूमेंगे साथ में
भीगी सी रात में

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