कोमल खलबल
दीया (Diya)48 воспр.
बिजली की ये रोशनियाँ बदल रही हैं कहानियाँ जूते मेरे चमक रहे रास्ते सब महक रहे नया ये मेरा दौर है मचाती मैं शोर हूँ पुरानी वो ज़ंजीरें टूटी किस्मत की ये लकीरें फूटी अब मैं अपनी मालिक हूँ खुद की ही मैं खालिक हूँ स्विंग में झूमूँ मैं आसमान चूमूँ मैं बंबई की ये रातें मीठी-मीठी बातें ठुमका और ताल है जीना बेमिसाल है दा-बा-दा-बा-दू-बे मज़ा मुझे खूब है बा-दी-दा-बा-दी-दा शहर मेरा महबूब है दफ्तर में मेरी अपनी शान काम से मेरी है पहचान पगार मेरी मुट्ठी में मज़ा है हर छुट्टी में किसी से क्यों डरूँ भला सीखी मैंने जीने की कला लिफ्ट में चढ़ती हूँ आगे मैं बढ़ती हूँ सपनों का ये शहर है मुझपे ही ये मेहर है स्विंग में झूमूँ मैं आसमान चूमूँ मैं बंबई की ये रातें मीठी-मीठी बातें ठुमका और ताल है जीना बेमिसाल है (Brass Call-and-Response with Scat Singing) शू-बी-डू-बा, ता-क-धिन ब्रास की गूँज, रात और दिन मंजीरा और ड्रम का मेल अनोखा ये दिल का खेल ढोलक की थाप पर स्विंग आज़ादी के नए विंग उड़ूँगी मैं तो बेझिझक देख ज़रा मेरी ये चमक सैक्सोफोन की ये पुकार दिल हुआ है अब बेकरार मंजिलें हैं सामने कोई नहीं थामने स्विंग में झूमूँ मैं आसमान चूमूँ मैं बंबई की ये रातें मीठी-मीठी बातें ठुमका और ताल है जीना बेमिसाल है दा-बा-दा-बा-दू-बे मज़ा मुझे खूब है बा-दी-दा-बा-दी-दा शहर मेरा महबूब है
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