भीगी यादें और चाय
दीया (Diya)93 reproduções
खिड़की पे गिरती है पहली बूँद आँखों को धीरे से लेती हूँ मूँद कागज़ की कश्ती में जादू भरा सपनों का टुकड़ा है इस पे धरा गीली सी मिट्टी की सौंधी महक दिल में है छोटी सी एक चहक स्याही से दिल की बात कही मंज़िल भी मेरी है यहीं कहीं उम्मीदें थामे ये बहने लगी धड़कन भी मीठा सा कहने लगी रंगीन पतंगों के पीछे उड़ूँ पुराने बाज़ार की ओर मुड़ूँ रिमझिम की ताल पे नाचे जिया खुशियों का प्याला है मैंने पिया बेपरवाह होकर हवा में बहूँ तारों से अपनी कहानी कहूँ ला ला ला, उड़ती पतंग ला ला ला, बारिश के संग झूमूँ मैं आज बेखौफ़ अंदाज़ गलियों की नाली में नैया चली मुड़ती हुई हर एक टेढ़ी गली मिठाई की खुशबू और छतरी का शोर खींचे मुझे अपनी यादों की ओर छोटे से कागज़ पे बड़ा सा जहाँ जाने ये कश्ती अब पहुँचेगी कहाँ लिखा है मैंने वो अनोखा ख़्वाब बूँदों में ढूँढा है हर एक जवाब मस्ती में खुद से ही मिलने लगी कलियों की तरह मैं खिलने लगी रंगीन पतंगों के पीछे उड़ूँ पुराने बाज़ार की ओर मुड़ूँ रिमझिम की ताल पे नाचे जिया खुशियों का प्याला है मैंने पिया बेपरवाह होकर हवा में बहूँ तारों से अपनी कहानी कहूँ पंख नहीं पर मैं उड़ सकती हूँ बादल से बातें भी कर सकती हूँ चुटकी में दुनिया को भर सकती हूँ हर एक डर से मैं लड़ सकती हूँ ऊँचा और ऊँचा ये मेरा सफ़र मुझको नहीं अब किसी की फ़िकर रंगीन पतंगों के पीछे उड़ूँ पुराने बाज़ार की ओर मुड़ूँ रिमझिम की ताल पे नाचे जिया खुशियों का प्याला है मैंने पिया बेपरवाह होकर हवा में बहूँ तारों से अपनी कहानी कहूँ ला ला ला, उड़ती पतंग ला ला ला, बारिश के संग झूमूँ मैं आज बेखौफ़ अंदाज़
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