धूप और चाय
दीया (Diya)29 回再生
पहाड़ों की ठंडी हवा चाय की प्याली से उठा धुआँ खिड़की पे ठहरी बारिश की बूंदें बीती वो बातें, आँखें जो मूंदें मद्धम सी खुशबू, गीली ज़मीन सब कुछ है सादा, सब कुछ हसीन दिल की ये धड़कन कुछ कहती है जैसे कोई सरगम बहती है अनकही सी एक बात है कैसी ये नई शुरुआत है? ये कैसी हलचल है? दिल में एक खलबल है तुम्हारी वो मुस्कान जैसे कोई अनजाना सा गान धीमे से बहती ये शाम लेके तुम्हारा ही नाम ला ला ला, बहती हवा जादू सा, होने लगा ला ला ला, मीठी हवा सब कुछ ही, खोने लगा रेशमी स्कार्फ हवा में उड़ा रास्ता मुड़ा, तू मुझसे जुड़ा बिना कहे सब कह दिया तूने ख्वाबों के धागे बुन लिए मैंने वो छोटी सी मेज़, वो कोना पुराना मुश्किल है अब तो, तुमको भुलाना शब्दों में ढलती ये रात है यादों की प्यारी बारात है तितली सा उड़ता ये मन महका है सारा उपवन ये कैसी हलचल है? दिल में एक खलबल है तुम्हारी वो मुस्कान जैसे कोई अनजाना सा गान धीमे से बहती ये शाम लेके तुम्हारा ही नाम नि ध प म, सुरों का ये बहना मुश्किल है चुपके से सब कुछ सहना यमन की वो तानें, रातों का जागना तेरी ही यादों के पीछे भागना धड़कन की लय में, तेरा ही ज़िक्र है खो जाने की अब, कैसी ये फ़िक्र है? कागज़ पे बिखरी स्याही की बूंदें यादों की गलियाँ, पलकें जो मूंदें कलम रुकी है, बात अधूरी मिट जाएगी ये, सारी ही दूरी इंतज़ार में बैठा, ये छोटा सा घर राहें तकती है, मेरी नज़र ये कैसी हलचल है? दिल में एक खलबल है तुम्हारी वो मुस्कान जैसे कोई अनजाना सा गान धीमे से बहती ये शाम लेके तुम्हारा ही नाम ला ला ला, बहती हवा जादू सा, होने लगा ला ला ला, मीठी हवा सब कुछ ही, खोने लगा
読み込み中…