धूप और चाय
दीया (Diya)29 diputar
गीली ये हवाएँ रेशमी सदायें धूप की किरण है मन ये मगन है बालकनी की मेज़ पर यादें हैं बिखरी हुई चाय की प्याली अभी है भरी हुई कागज़ पुराना किस्सा सुहाना स्याही की लकीरें पुरानी वो तस्वीरें धड़कन की ये लय जैसे कोई विस्मय वो अधूरी कहानी जैसे बहता पानी सुकून दे जाती है पास ले आती है चिट्ठियों का ये सफ़र रुक गया है वक्त मगर मीठी सी ये दूरी इश्क़ की मज़बूरी हल्की सी उदासी मन की ये प्यासी साँसों में घुली बातें अनकही कबासा की धड़कन गिटार का ये गूँजन तुम्हारी वो बातें जागी हुई रातें हाथों की वो लिखावट जैसे कोई सजावट पन्नों की वो महक जैसे कोई चहक हल्की सी ठंडक बीती वो दस्तक दिल की ये ज़मीन लगती है हसीन रंगों की ये फुहार जैसे पहला प्यार वो अधूरी कहानी जैसे बहता पानी सुकून दे जाती है पास ले आती है चिट्ठियों का ये सफ़र रुक गया है वक्त मगर मीठी सी ये दूरी इश्क़ की मज़बूरी खमाज का ये सुर दूरी हो गई दूर साँसों में बसी है एक अनकही हंसी है अधूरापन प्यारा है यही तो सहारा है नूर की ये बारिश दिल की ये गुज़ारिश वो अधूरी कहानी जैसे बहता पानी सुकून दे जाती है पास ले आती है चिट्ठियों का ये सफ़र रुक गया है वक्त मगर मीठी सी ये दूरी इश्क़ की मज़बूरी हल्की सी उदासी मन की ये प्यासी साँसों में घुली बातें अनकही
Memuat…