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शून्य का आँगन (Courtyard of Void)

दीया (Diya)

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Lirik

शिखर पे वो पुराना शिवालय
बचपन का भीगा वो आलय
पत्थरों पे जमी है जो काई
हवाओं ने दी है दुहाई
लौट आई हूँ बरसों के बाद
लेकर धुंधली सी एक याद

पहाड़ों की ठंडी पुकार
खुलने लगा मन का द्वार
साँसों में बसी है शांति
मिटने लगी है सब भ्रांति

बूँदें गिरें पत्थर की सीढ़ियों पे
मन बहने दो अब इन नदियों में
खाली आँगन भरा हुआ मन
शिव को अर्पण ये सारा जीवन
बूँदें गिरें पत्थर की सीढ़ियों पे
मन बहने दो अब इन नदियों में
खाली आँगन भरा हुआ मन
शिव को अर्पण ये सारा जीवन

ओम नमः शिवाय
बह जाए ये माया
ओम नमः शिवाय
मिल जाए ये छाया

छोटी घंटियाँ बजती हैं धीरे
धूप की खुशबू जैसे लकीरें
बाँसुरी की वो मीठी सी तान
खो गया मेरा सारा गुमान
भीगे पत्तों की सरसराहट
सुनाई दे अपनी ही आहट

पहाड़ों की ठंडी पुकार
खुलने लगा मन का द्वार
साँसों में बसी है शांति
मिटने लगी है सब भ्रांति

बूँदें गिरें पत्थर की सीढ़ियों पे
मन बहने दो अब इन नदियों में
खाली आँगन भरा हुआ मन
शिव को अर्पण ये सारा जीवन
बूँदें गिरें पत्थर की सीढ़ियों पे
मन बहने दो अब इन नदियों में
खाली आँगन भरा हुआ मन
शिव को अर्पण ये सारा जीवन

ब्रह्मांड की शांति समाई
दुखों से मिली अब विदाई
न कोई गिला न मलाल
सुलझ गए सारे सवाल
शून्य में खुद को पाया
छूट गई अपनी ही छाया

ठहर गया है ये पल
थक गया मन चंचल
बरसने दो ये सावन
पवित्र हुआ ये तन-मन

बूँदें गिरें पत्थर की सीढ़ियों पे
मन बहने दो अब इन नदियों में
खाली आँगन भरा हुआ मन
शिव को अर्पण ये सारा जीवन
बूँदें गिरें पत्थर की सीढ़ियों पे
मन बहने do अब इन नदियों में
खाली आँगन भरा हुआ मन
शिव को अर्पण ये सारा जीवन

ओम नमः शिवाय
बह जाए ये माया
ओम नमः शिवाय
मिल जाए ये छाया

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