नम मिट्टी की महक
आरव (Aarav)10 diputar
कोंकण की वो गीली मिट्टी बादाम के फूलों की चिट्ठी हवा में घुली है एक खुशबू यादों का पुराना वो जादू बारिश के बाद की ये नमी जैसे पूरी हुई कोई कमी नारियल का वो ठंडा पानी शुरू हुई थी एक कहानी लहरों ने जब पैर छुए थे हम दोनों ही चुप हुए थे धीमे धीमे बहती हवा पुरानी यादों की ये दवा सुनहरा सा वो किनारा सुकून का है ये सहारा धीमे धीमे बहती हवा पुरानी यादों की ये दवा सुनहरा सा वो किनारा सुकून का है ये सहारा लहरें आती हैं लहरें जाती हैं वक़्त ठहरता है दिल संवरता है रेत पे चप्पलों के निशां खोया हुआ सा वो आसमां पत्थर की वो उलटी नाव ठहरे हुए से मेरे पाँव नारियल की वो खाली आवाज़ जैसे कोई अनसुना सा साज़ धीमे धीमे बहती हवा पुरानी यादों की ये दवा सुनहरा सा वो किनारा सुकून का है ये सहारा धीमे धीमे बहती हवा पुरानी यादों की ये दवा सुनहरा सा वो किनारा सुकून का है ये सहारा सूरज की वो लाल किरणें थकी शाम की मीठी धुनें कोई जल्दी नहीं है अब रुक गया है ये वक़्त सब हल्का सा एक ये मलाल सुलझ गया है हर सवाल वो अनजान सी एक लड़की आँखों में चमक थी कड़की भीगी रेत पर वो चलना धूप का धीरे से ढलना आज भी वो खुशबू आती है मुझे फिर से वहीं ले जाती है वो लम्हा आज भी ज़िंदा है मेरा दिल फिर से परिंदा है धीमे धीमे बहती हवा पुरानी यादों की ये दवा सुनहरा सा वो किनारा सुकून का है ये सहारा धीमे धीमे बहती हवा पुरानी यादों की ये दवा सुनहरा सा वो किनारा सुकून का है ये सहारा लहरें आती हैं लहरें जाती हैं वक़्त ठहरता है दिल संवरता है
Memuat…