acoustic ballad

सूखा गुलाब (Shukriya)

दीया (Diya)

56 बजाव · 0 पसंदीदा · 4:50

गीत

बारिश थमी है अभी
किताबें खुली हैं सभी
धूल में लिपटी यादें
भीगी सी कुछ बातें
पुरानी वो बेंच, पुराना बस्ता
धुंधला सा वही एक रास्ता
धड़कन ज़रा थमी है
आँखों में नमी है

पन्नों के बीच छुपा था
एक सूखा हुआ गुलाब
अधूरा सा एक ख़्वाब
वही पुराना हिसाब
जो रह गया था अनकहा
दर्द जो दिल ने सहा

शुक्रिया तेरा, ऐ दोस्त मेरे
अंधेरे जो थे, वो अपने लगे
सीखा मैंने गिरकर संभलना
तन्हा राहों पे अकेले चलना
तू ही तो था मेरा पहला सबक
ज़िंदगी की वही पहली चमक
हाँ, शुक्रिया
तेरा शुक्रिया

कागज़ पे बिखरी स्याही
वक्त की है ये गवाही
शुक्रिया
तेरा शुक्रिया

गिले थे, शिकवे भी थे
हम दोनों ज़िद्दी भी थे
कोरा था मन का कागज़
लिखने चले थे हम राज़
नादानी में जो रूठ गए
धागे वो सारे टूट गए
पर अब ना कोई बोझ है
नया एक रोज़ है

मिले जो ये सूखे पत्ते
खुल गए सारे लफ़्ते
वो बचपन की नादानी
खत्म हुई इक कहानी
पर तूने ही मुझे गढ़ा है
ज़िंदगी को आगे पढ़ा है

शुक्रिया तेरा, ऐ दोस्त मेरे
अंधेरे जो थे, वो अपने लगे
सीखा मैंने गिरकर संभलना
तन्हा राहों पे अकेले चलना
तू ही तो था मेरा पहला सबक
ज़िंदगी की वही पहली चमक
हाँ, शुक्रिया
तेरा शुक्रिया

वक्त ने बदली है रंगत
छूट गई तेरी वो संगत
पर जो तू ना होता
तो मैं भी ना होती
बड़ी हो गई हूँ मैं शायद
पा ली है अपनी ही सरहद
महक आज भी है बाकी
उन लम्हों की साकी

शुक्रिया तेरा, ऐ दोस्त मेरे
अंधेरे जो थे, वो अपने लगे
सीखा मैंने गिरकर संभलना
तन्हा राहों पे अकेले चलना
तू ही तो था मेरा पहला सबक
ज़िंदगी की वही पहली चमक
हाँ, शुक्रिया
तेरा शुक्रिया

कागज़ पे बिखरी स्याही
वक्त की है ये गवाही
शुक्रिया
तेरा शुक्रिया

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