bossa nova

गीली रेत का सुकून

आरव (Aarav)

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गीत

कोंकण की वो गीली मिट्टी
बादाम के फूलों की चिट्ठी
हवा में घुली है एक खुशबू
यादों का पुराना वो जादू
बारिश के बाद की ये नमी
जैसे पूरी हुई कोई कमी

नारियल का वो ठंडा पानी
शुरू हुई थी एक कहानी
लहरों ने जब पैर छुए थे
हम दोनों ही चुप हुए थे

धीमे धीमे बहती हवा
पुरानी यादों की ये दवा
सुनहरा सा वो किनारा
सुकून का है ये सहारा
धीमे धीमे बहती हवा
पुरानी यादों की ये दवा
सुनहरा सा वो किनारा
सुकून का है ये सहारा

लहरें आती हैं
लहरें जाती हैं
वक़्त ठहरता है
दिल संवरता है

रेत पे चप्पलों के निशां
खोया हुआ सा वो आसमां
पत्थर की वो उलटी नाव
ठहरे हुए से मेरे पाँव
नारियल की वो खाली आवाज़
जैसे कोई अनसुना सा साज़

धीमे धीमे बहती हवा
पुरानी यादों की ये दवा
सुनहरा सा वो किनारा
सुकून का है ये सहारा
धीमे धीमे बहती हवा
पुरानी यादों की ये दवा
सुनहरा सा वो किनारा
सुकून का है ये सहारा

सूरज की वो लाल किरणें
थकी शाम की मीठी धुनें
कोई जल्दी नहीं है अब
रुक गया है ये वक़्त सब
हल्का सा एक ये मलाल
सुलझ गया है हर सवाल

वो अनजान सी एक लड़की
आँखों में चमक थी कड़की
भीगी रेत पर वो चलना
धूप का धीरे से ढलना
आज भी वो खुशबू आती है
मुझे फिर से वहीं ले जाती है
वो लम्हा आज भी ज़िंदा है
मेरा दिल फिर से परिंदा है

धीमे धीमे बहती हवा
पुरानी यादों की ये दवा
सुनहरा सा वो किनारा
सुकून का है ये सहारा
धीमे धीमे बहती हवा
पुरानी यादों की ये दवा
सुनहरा सा वो किनारा
सुकून का है ये सहारा

लहरें आती हैं
लहरें जाती हैं
वक़्त ठहरता है
दिल संवरता है

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