Wahi Purani Chai
आरव (Aarav)48 बजाव
मैदान फतह कर आए यार ढोल बजाओ ज़ोरदार मैदान फतह कर आए यार ढोल बजाओ ज़ोरदार मिट्टी में हमने खेल दिखाया सबका हमने मान घटाया थपकी मारी जांघ हिलाई जीत की गूंज शहर तक आई मिट्टी की खुशबू जिस्म पे ताज़ा बजने दो अब जीत का बाजा कप्तान का देखो स्वैग निराला गले में जीत की फूलों की माला हारी हुई टीम को देख के हंसना मुश्किल है अब हमसे बचना चक दे फट्टे नप दे गिल्ली हमसे भिड़े जो हवा हुई ढीली पगड़ी अपनी शान है पिंड की ये पहचान है चक दे फट्टे नप दे गिल्ली हमसे भिड़े जो हवा हुई ढीली पगड़ी अपनी शान है पिंड की ये पहचान है ओए चक दे! (चक दे!) ओए नप दे! (नप दे!) बल्ले बल्ले बल्ले बल्ले शावा शावा शावा शावा मेले में अब धूम मचेगी अपनी ही अब बीन बजेगी हारी हुई टीम का उतरा चेहरा सिर पर सजा है जीत का सेहरा वो देखो कैसे दूर खड़े हैं हम तो सबके बाप बड़े हैं इकतारा बोले धुन मस्तानी लिख दी हमने नई कहानी बांसुरी की तान पे नाचो अपनी जीत का जश्न मनाओ चक दे फट्टे नप दे गिल्ली हमसे भिड़े जो हवा हुई ढीली पगड़ी अपनी शान है पिंड की ये पहचान है चक दे फट्टे नप दे गिल्ली हमसे भिड़े जो हवा हुई ढीली पगड़ी अपनी शान है पिंड की ये पहचान है धमक ढोल की धड़कन तेज़ खत्म हुआ अब सारा क्लेश चिमटा बोले खन खन खन झूम रहा है सबका मन ऊंची तान और ऊंची शान हम हैं भारत की संतान मैदान फतह कर आए यार ढोल बजाओ ज़ोरदार मैदान फतह कर आए यार ढोल बजाओ ज़ोरदार चक दे फट्टे नप दे गिल्ली हमसे भिड़े जो हवा हुई ढीली पगड़ी अपनी शान है पिंड की ये पहचान है चक दे फट्टे नप दे गिल्ली हमसे भिड़े जो हवा हुई ढीली पगड़ी अपनी शान है पिंड की ये पहचान है ओए चक दे! (चक दे!) ओए नप दे! (नप दे!) बल्ले बल्ले बल्ले बल्ले शावा शावा शावा शावा
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