bhajan

बूंदों का अभिषेक

आरव (Aarav)

21 reproducciones · 0 favoritos · 4:35

Letra

पत्थर की दीवारें
सुनती ये पुकारें
नदी की ये कल-कल
जैसे कोई पल-पल
बरसती ये बूंदें
करती शृंगार है
मेरे महादेव का
पावन दरबार है

दीपक की बाती
धीरे से जलती है
धुएं की खुशबू
हवा में पलती है

बूंदों का अभिषेक हो
शिवलिंग के द्वार पर
बैठा हूँ मैं झुक कर
तेरे ही आधार पर
कोई मांग नहीं है
कोई चमत्कार नहीं
बस जगह दे दे प्रभु
अपने इस द्वार पर

शंभू ओ शंभू
मेरे भोले शंभू
शंभू ओ शंभू
मेरे भोले शंभू

कमियां हैं मुझमें
भूलें भी भारी हैं
पर तेरी रहमत
सबसे ही प्यारी है
बेलपत्र लाया हूँ
श्रद्धा की थाली में
जीवन महक जाए
तेरी ही प्याली में

ओम नमः शिवाय
हर हर नमो
ओम नमः शिवाय
हर हर नमो

बाहर है सावन
अंदर है शांति
मिट जाए मन की
सारी ये भ्रांति
गंगा की लहरें
चरणों को धोती हैं
भक्त की ये आंखें
प्रेम में रोती हैं

अकेला बैठा हूँ
तेरी ही याद में
सुकून मिलता है
तेरी फरियाद में
न धन की है आशा
न मान की है भूख
बस तू न होना
कभी मुझसे विमुख

बूंदों का अभिषेक हो
शिवलिंग के द्वार पर
बैठा हूँ मैं झुक कर
तेरे ही आधार पर
कोई मांग नहीं है
कोई चमत्कार नहीं
बस जगह दे दे प्रभु
अपने इस द्वार पर

शंभू ओ शंभू
मेरे भोले शंभू
शंभू ओ शंभू
मेरे भोले शंभू

Comentarios (0)

0/500

Cargando…

Pistas relacionadas