भीगी यादें और चाय
दीया (Diya)93 Wiedergaben
शिखर पे वो पुराना शिवालय बचपन का भीगा वो आलय पत्थरों पे जमी है जो काई हवाओं ने दी है दुहाई लौट आई हूँ बरसों के बाद लेकर धुंधली सी एक याद पहाड़ों की ठंडी पुकार खुलने लगा मन का द्वार साँसों में बसी है शांति मिटने लगी है सब भ्रांति बूँदें गिरें पत्थर की सीढ़ियों पे मन बहने दो अब इन नदियों में खाली आँगन भरा हुआ मन शिव को अर्पण ये सारा जीवन बूँदें गिरें पत्थर की सीढ़ियों पे मन बहने दो अब इन नदियों में खाली आँगन भरा हुआ मन शिव को अर्पण ये सारा जीवन ओम नमः शिवाय बह जाए ये माया ओम नमः शिवाय मिल जाए ये छाया छोटी घंटियाँ बजती हैं धीरे धूप की खुशबू जैसे लकीरें बाँसुरी की वो मीठी सी तान खो गया मेरा सारा गुमान भीगे पत्तों की सरसराहट सुनाई दे अपनी ही आहट पहाड़ों की ठंडी पुकार खुलने लगा मन का द्वार साँसों में बसी है शांति मिटने लगी है सब भ्रांति बूँदें गिरें पत्थर की सीढ़ियों पे मन बहने दो अब इन नदियों में खाली आँगन भरा हुआ मन शिव को अर्पण ये सारा जीवन बूँदें गिरें पत्थर की सीढ़ियों पे मन बहने दो अब इन नदियों में खाली आँगन भरा हुआ मन शिव को अर्पण ये सारा जीवन ब्रह्मांड की शांति समाई दुखों से मिली अब विदाई न कोई गिला न मलाल सुलझ गए सारे सवाल शून्य में खुद को पाया छूट गई अपनी ही छाया ठहर गया है ये पल थक गया मन चंचल बरसने दो ये सावन पवित्र हुआ ये तन-मन बूँदें गिरें पत्थर की सीढ़ियों पे मन बहने दो अब इन नदियों में खाली आँगन भरा हुआ मन शिव को अर्पण ये सारा जीवन बूँदें गिरें पत्थर की सीढ़ियों पे मन बहने do अब इन नदियों में खाली आँगन भरा हुआ मन शिव को अर्पण ये सारा जीवन ओम नमः शिवाय बह जाए ये माया ओम नमः शिवाय मिल जाए ये छाया
Wird geladen…