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रात के एक बजे हैं खिड़की पे बूंदें सजी हैं गिटार के तार धीमे बजें पुरानी यादें फिर से सजें डायरी का वो पीला पन्ना जैसे कोई अनकहा तमन्ना दस साल पहले की वो कसम जब आँखें थीं थोड़ी सी नम खुद से कहा था कभी न रुकना दुनिया के आगे कभी न झुकना मैंने वो वादा निभाया है अपना ही बचपन बचाया है बारिश में भीगना अब भी पसंद मन के परिंदे आज भी बुलंद चाय की खुशबू और ये सुकून जीने का वही पुराना जुनून वादा निभाया है खुद को पाया है दफ्तर की फाइलें और काम थक जाती थी हर एक शाम पर मैंने वो शौक न छोड़े रिश्ते खुद से कभी न तोड़े गीली मिट्टी की वो महक दिल में बसी है वही चहक भीड़ में अपनी एक जगह जीने की बस यही वजह खुद को न खोने का वो इरादा आज भी है सबसे ज़्यादा मैंने वो वादा निभाया है अपना ही बचपन बचाया है बारिश में भीगना अब भी पसंद मन के परिंदे आज भी बुलंद चाय की खुशबू और ये सुकून जीने का वही पुराना जुनून वक्त की लहरें आती रहीं मुझको थोड़ा डराती रहीं पर मैं वही लड़की रही ख्वाबों में जो बहती रही सच्ची है मेरी ये मुस्कान खुद ही बनी अपनी पहचान मैंने निभाया खुद को बचाया मैंने निभाया खुद को बचाया मैंने वो वादा निभाया है अपना ही बचपन बचाया है बारिश में भीगना अब भी पसंद मन के परिंदे आज भी बुलंद चाय की खुशबू और ये सुकून जीने का वही पुराना जुनून वादा निभाया है खुद को पाया है वादा निभाया है खुद को पाया है
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